अनुमान लगाना (Inference)
Inference का मतलब है लेखक की बिना कही बात को पाठ के संकेतों और अपनी जानकारी से समझ लेना। इसे अक्सर पंक्तियों के बीच पढ़ना कहते हैं।
भाषा · आयु 9–11 · 60 मिनट
बच्चे किसी पाठ में उपमा (simile) और रूपक (metaphor) पहचानते हैं, समझाते हैं कि किसी तुलना का पाठक पर क्या असर होता है, और अपनी नई तुलनाएँ लिखते हैं।
हर बटन दबाने पर नई बनती हैं और स्क्रीन पर तुरंत जँचती हैं।
उपमा और रूपक हिंदी व्याकरण में अलंकार के रूप में पढ़ाए जाते हैं, और बड़ी कक्षाओं में इनकी परिभाषाएँ और उदाहरण विस्तार से आते हैं। यह पाठ परिभाषा रटवाने से ज़्यादा इस पर है कि लेखक तुलना क्यों करते हैं और अपनी ताज़ा तुलना कैसे बनाएँ।
तुलना पूरी करो: शुरुआत बोलें और बच्चों को अंत बोलने दें।
"बर्फ़ जैसा..." ठंडा। "शेर जैसा..." बहादुर। "वह हवा की तरह..." दौड़ा।
"ये सब तुम्हें आते थे। क्यों?" हमने इन्हें बहुत बार सुना है। "बिल्कुल। ये इतनी बार इस्तेमाल हुए हैं कि बासी हो गए हैं। इन्हें घिसे-पिटे प्रयोग कहते हैं। आज हम सीखेंगे कि ये तुलनाएँ क्या हैं, लेखक इन्हें क्यों इस्तेमाल करते हैं, और ताज़ा तुलनाएँ कैसे बनाएँ।"
"उपमा दो अलग चीज़ों की तुलना जैसा, जैसी, जैसे, की तरह, सा या जितना जैसे शब्दों से करती है: कोहरा एक भूरे कंबल जैसा था।"
"रूपक कहता है कि एक चीज़ दूसरी है, बिना जैसा या की तरह के: कोहरा एक भूरा कंबल था।"
"दोनों में से कोई भी शाब्दिक रूप से सच नहीं है। कोहरा कंबल नहीं है। इसीलिए यह आलंकारिक भाषा है। लेखक चाहता है कि तुम कुछ देखो या महसूस करो।"
नानाजी का रेडियो की शुरुआत ज़ोर से पढ़ें, फिर ये पंक्तियाँ दिखाएँ:
शहद वाली उपमा के लिए अपनी सोच ज़ोर से बोलकर दिखाएँ:
"शहद कैसा होता है? मीठा, चिकना, सुनहरा, गुनगुना, सुकून देने वाला। तो गायिका की आवाज़... चिकनी, मीठी और सुकून देने वाली है। कुछ ही शब्दों में लेखक हमें बहुत कुछ बता देता है, और हमें महसूस करवाता है कि नानाजी को कैसा लग रहा है।"
जोड़ियों से "तारों... का एक नन्हा शहर" के लिए यही करवाएँ। यह उपमा है या रूपक? (रूपक: इसमें जैसा नहीं है।) शहर सुनकर मन में क्या तस्वीर बनती है? बहुत सारे हिस्से, चहल-पहल, सब सलीके से, गिनने में बहुत ज़्यादा।