पढ़ाई के तरीके
Spaced repetition (अंतराल पर दोहराना) क्या होता है?
छोटा जवाब
Spaced repetition का मतलब है जो सीखा है उसे बीच में अंतराल देकर कई बार दोहराना, सब कुछ एक साथ रटने की जगह। अंतराल यादों को ज़्यादा टिकाऊ बनाते हैं।
एक वाक्य में
Spaced repetition उसी सामग्री पर बार-बार लौटना है, हर बार बढ़ते अंतराल के साथ।
समझिए
1880 के दशक में जर्मन मनोवैज्ञानिक हरमन एबिंगहॉस (Hermann Ebbinghaus) ने अपनी याददाश्त परखी और देखा कि हम नई जानकारी पहले जल्दी भूलते हैं, फिर धीरे-धीरे। इस पैटर्न को भूलने का वक्र (forgetting curve) कहते हैं। उन्होंने यह भी पाया कि अंतराल के बाद सामग्री को फिर दोहराने से भूलना धीमा हो जाता है।
तब से कई अध्ययनों में यही मिला है, जिसे अक्सर spacing effect कहते हैं: अगर आपके पास कुछ सीखने के लिए दो घंटे हैं, तो उन्हें दो हफ़्तों में फैले आधे-आधे घंटे के चार सत्रों में बाँटना आम तौर पर एक दो घंटे के सत्र से बेहतर रहता है। कुल समय वही है; समय का बँटवारा अलग है।
क्यों? जब आप अंतराल के बाद किसी विषय पर लौटते हैं, तो आप थोड़ा भूल चुके होते हैं, इसलिए याद करने में मेहनत लगती है। वही मेहनत याद को टिकाती है। Spacing तब सबसे अच्छा काम करता है जब हर दोहराव खुद को परखना हो, active recall के साथ, सिर्फ़ दोबारा पढ़ना नहीं।
कोई एक आदर्श कार्यक्रम नहीं है। समझदार शुरुआती पैटर्न है: नई सामग्री को अगले दिन दोहराइए, फिर कुछ दिन बाद, फिर एक हफ़्ते बाद, फिर कुछ हफ़्ते बाद। अगर कुछ आसान है, तो लंबे अंतराल रखिए; अगर बार-बार गलत हो रहा है, तो जल्दी दोहराइए।
घड़ी
कॉपी
डिब्बा
पेंसिल
उदाहरण
एक विषय के लिए सरल spacing योजना:
| कब | क्या करें |
|---|---|
| दिन 1 | सीखिए और सवाल या फ़्लैशकार्ड बनाइए |
| दिन 2 | खुद को परखिए, गलतियाँ सुधारिए |
| दिन 5 | फिर परखिए |
| दिन 12 | फिर परखिए |
| दिन 30 | परीक्षा से पहले आख़िरी जाँच |
Leitner बॉक्स प्रणाली (सेबास्टियन लाइटनर के नाम पर, जिन्होंने इसे 1970 के दशक में बताया): तीन डिब्बे इस्तेमाल कीजिए। नए फ़्लैशकार्ड बॉक्स 1 से शुरू होते हैं, जिसे हर दिन दोहराया जाता है। एक सही हो तो वह बॉक्स 2 में जाता है (हर कुछ दिन में), फिर बॉक्स 3 में (हफ़्ते में एक बार)। गलत हो तो वह बॉक्स 1 में लौट आता है।
आम गलतियाँ
- सारे दोहराव आख़िरी हफ़्ते के लिए छोड़ देना। Spacing को समय चाहिए, इसलिए जल्दी शुरू कीजिए।
- दोबारा पढ़कर दोहराना। हर दोहराव प्रश्नोत्तरी होना चाहिए, सरसरी नज़र नहीं।
- अंतराल कभी न बदलना। कठिन सामग्री पर ज़्यादा और जो अच्छी तरह आती है उस पर कम समय लगाइए।
छोटा क्विज़
अंतराल पर दोहराना (Spaced repetition)
3 छोटे सवालों से जाँचें कि आप कितना जानते हैं।
सवाल 1 / 3
कौन-सी योजना spaced repetition इस्तेमाल करती है?
अभ्यास करें
करके देखो
रिवीज़न फ़्लैशकार्ड प्रिंट कीजिए
अपने अंतराल की योजना रिवीज़न टाइमटेबल से बनाइए।
बड़ों के लिए
जुड़े हुए विषय
सक्रिय स्मरण (Active recall)
एक्टिव रिकॉल का मतलब है दोबारा पढ़ने के बजाय याददाश्त से जानकारी निकालकर खुद को परखना। दोहराई (रिवीज़न) के सबसे भरोसेमंद तरीकों में से यह एक है।
फ़्लैशकार्ड (Flashcards)
फ़्लैशकार्ड छोटे कार्ड होते हैं जिनके एक ओर सवाल और दूसरी ओर जवाब होता है। ये तब सबसे अच्छा काम करते हैं जब आप पलटने से पहले याददाश्त से जवाब दें।
रिवीज़न टाइमटेबल (Revision timetable)
रिवीज़न टाइमटेबल इस बात की योजना है कि क्या और कब दोहराना है। अच्छे टाइमटेबल में छोटे सत्र होते हैं, विषय मिले-जुले होते हैं, विषय अंतराल के बाद दोबारा आते हैं और आराम का समय रहता है।
परीक्षा की तकनीक (Exam technique)
परीक्षा तकनीक उन हुनरों का समूह है जिनसे परीक्षा के दिन प्रश्नपत्र अच्छे से हल होता है, जैसे प्रश्न ध्यान से पढ़ना, अंकों से समय की योजना बनाना और अपना काम जाँचना।
नोट्स बनाना (Note-taking)
अच्छे नोट्स छोटे होते हैं, आपके अपने शब्दों में, और ऐसे सजे होते हैं कि बाद में खुद को परख सकें। Cornell जैसे तरीकों में सवाल और सारांश पहले से जुड़े होते हैं।
ग्रोथ माइंडसेट (विकास की सोच)
ग्रोथ माइंडसेट यह विश्वास है कि अभ्यास, अच्छी रणनीतियों और मदद से क्षमताएँ बेहतर हो सकती हैं। फ़िक्स्ड माइंडसेट यह मानना है कि प्रतिभा या तो होती है या नहीं होती।