पढ़ाई के तरीके
एक्टिव रिकॉल (सक्रिय स्मरण) क्या है?
छोटा जवाब
एक्टिव रिकॉल का मतलब है दोबारा पढ़ने के बजाय याददाश्त से जानकारी निकालकर खुद को परखना। दोहराई (रिवीज़न) के सबसे भरोसेमंद तरीकों में से यह एक है।
एक वाक्य में
एक्टिव रिकॉल का मतलब है नोट्स दोबारा पढ़ने की जगह खुद से सवाल पूछना और याददाश्त से जवाब देना।
समझिए
जब भी आप कोई तथ्य याददाश्त से बाहर निकालते हैं, अगली बार उसे ढूँढ़ना आसान हो जाता है। मनोवैज्ञानिक इसे रिट्रीवल प्रैक्टिस या टेस्टिंग इफ़ेक्ट कहते हैं, और प्रयोगशालाओं व कक्षाओं में सौ साल से ज़्यादा समय से इस पर अध्ययन हुए हैं। कई प्रयोगों में, जिन छात्रों ने खुद को परखा उन्हें एक हफ़्ते बाद उन छात्रों से ज़्यादा याद रहा जिन्होंने उतना ही समय दोबारा पढ़ने में लगाया।
दोबारा पढ़ना और हाइलाइट करना काम का लगता है, क्योंकि पन्ना जाना-पहचाना दिखता है। पर जाना-पहचाना होना याद होना नहीं है। परीक्षा में पन्ना आपके सामने नहीं होता; आपको खुद याद करना पड़ता है। एक्टिव रिकॉल ठीक वही अभ्यास कराता है।
खुद को परखना अक्सर दोबारा पढ़ने से ज़्यादा मुश्किल और धीमा लगता है, और आप कुछ चीज़ें गलत भी करेंगे। यह सामान्य है, और इसके असरदार होने की एक वजह भी यही है। असली बात यह है कि बाद में तुरंत अपने उत्तर जाँचिए, ताकि गलतियाँ सुधरें, याद न हो जाएँ।
एक्टिव रिकॉल स्पेस्ड रिपीटिशन के साथ सबसे अच्छा चलता है: यानी उसी सामग्री पर कुछ दिन बाद, फिर एक हफ़्ते बाद खुद को दोबारा परखना। यह पढ़ाई की एक मज़बूत आदत है, कोई जादू नहीं; विषय पहले समझना फिर भी ज़रूरी है। ब्रिटेन की Education Endowment Foundation ने स्कूलों में रिट्रीवल और अंतराल पर साक्ष्यों की समीक्षा की है, जिसका सार यहाँ (अंग्रेज़ी में) पढ़ सकते हैं।
कॉपी
पेंसिल
किताब
घड़ी
उदाहरण
- ब्रेन डंप: नोट्स बंद करके पाँच मिनट में प्रकाश-संश्लेषण के बारे में जो भी जानते हैं सब लिख डालिए। फिर नोट्स खोलकर छूटी बातें दूसरे रंग से भर दीजिए।
- फ़्लैशकार्ड: सामने सवाल, पीछे जवाब। कार्ड पलटने से पहले जवाब बोलिए।
- पिछले साल के प्रश्न: नोट्स देखे बिना परीक्षा के सवाल हल कीजिए, फिर खुद जाँचिए।
- दूसरे को समझाइए: बिना देखे किसी दोस्त, माता-पिता या पालतू जानवर को ज़ोर से समझाइए।
- खाली चित्र: हृदय या जल-चक्र का चित्र याददाश्त से बनाकर नाम लिखिए।
आम गलतियाँ
- बहुत जल्दी झाँक लेना। जवाब जाँचने से पहले सच में कोशिश कीजिए, भले पक्का न हो।
- सिर्फ़ वही परखना जो आपको पहले से आता है। ज़्यादातर समय उन्हीं कार्डों और सवालों को दीजिए जो गलत होते हैं।
- उत्तर न जाँचना। बिना जाँच के परखने से गलतियाँ पक्की हो सकती हैं।
- सारे टेस्ट एक ही रात में कर डालना। उन्हें दिनों और हफ़्तों में फैलाइए।
छोटा क्विज़
सक्रिय स्मरण (Active recall)
4 छोटे सवालों से जाँचें कि आप कितना जानते हैं।
सवाल 1 / 4
इनमें से कौन-सा एक्टिव रिकॉल है?
अभ्यास करें
करके देखो
खुद को परखने के लिए फ़्लैशकार्ड
बड़ों के लिए
जुड़े हुए विषय
अंतराल पर दोहराना (Spaced repetition)
Spaced repetition का मतलब है जो सीखा है उसे बीच में अंतराल देकर कई बार दोहराना, सब कुछ एक साथ रटने की जगह। अंतराल यादों को ज़्यादा टिकाऊ बनाते हैं।
फ़्लैशकार्ड (Flashcards)
फ़्लैशकार्ड छोटे कार्ड होते हैं जिनके एक ओर सवाल और दूसरी ओर जवाब होता है। ये तब सबसे अच्छा काम करते हैं जब आप पलटने से पहले याददाश्त से जवाब दें।
परीक्षा की तकनीक (Exam technique)
परीक्षा तकनीक उन हुनरों का समूह है जिनसे परीक्षा के दिन प्रश्नपत्र अच्छे से हल होता है, जैसे प्रश्न ध्यान से पढ़ना, अंकों से समय की योजना बनाना और अपना काम जाँचना।
रिवीज़न टाइमटेबल (Revision timetable)
रिवीज़न टाइमटेबल इस बात की योजना है कि क्या और कब दोहराना है। अच्छे टाइमटेबल में छोटे सत्र होते हैं, विषय मिले-जुले होते हैं, विषय अंतराल के बाद दोबारा आते हैं और आराम का समय रहता है।
नोट्स बनाना (Note-taking)
अच्छे नोट्स छोटे होते हैं, आपके अपने शब्दों में, और ऐसे सजे होते हैं कि बाद में खुद को परख सकें। Cornell जैसे तरीकों में सवाल और सारांश पहले से जुड़े होते हैं।
ग्रोथ माइंडसेट (विकास की सोच)
ग्रोथ माइंडसेट यह विश्वास है कि अभ्यास, अच्छी रणनीतियों और मदद से क्षमताएँ बेहतर हो सकती हैं। फ़िक्स्ड माइंडसेट यह मानना है कि प्रतिभा या तो होती है या नहीं होती।