बिजली के जासूस
एक शाम नूर और उसके भाई सामी ने देखा कि मम्मी एक काग़ज़ को देखकर माथे पर बल डाले बैठी हैं। “इस महीने बिजली का बिल बहुत ज़्यादा आया है,” उन्होंने आह भरी।
नूर को एक तरकीब सूझी। “सामी, चलो हम बिजली के जासूस बनते हैं!” उन्होंने गत्ते से बैज बनाए और एक नोटबुक उठा ली। फिर वे पूरे घर में सुराग ढूँढने लगे।
पहला सुराग: बाथरूम की बत्ती जल रही थी, पर बाथरूम में कोई नहीं था। दूसरा सुराग: टीवी सोया हुआ था, पर उसकी छोटी लाल बत्ती चमक रही थी, और वह रात भर बिजली खा रहा था। तीसरा सुराग: दादाजी का चार्जर प्लग में लगा था, पर उनका फ़ोन तो उनकी जेब में था!
जासूसों ने नियमों की एक सूची लिखी और फ़्रिज पर चिपका दी: “कमरे से निकलो तो बत्ती बुझाओ। टीवी को पूरी तरह बंद करो। चार्जर का प्लग निकालो। फ़्रिज का दरवाज़ा जल्दी बंद करो।” सामी ने हर नियम के पास एक मुस्कुराता हुआ बल्ब बनाया।
पूरे परिवार ने नियम माने, दादाजी ने भी। एक महीने बाद मम्मी ने नया बिल खोला और मुस्कुरा दीं। “यह कम आया है!” उन्होंने कहा। “जो पैसे बचे हैं, उनसे हम पार्क में पिकनिक मनाएँगे।” बिजली के जासूस ख़ुशी से उछल पड़े। केस बंद!