टप, टप, टप
रात को लीना ने एक आवाज़ सुनी। टप, टप, टप! वह बिस्तर से उठी और आवाज़ के पीछे-पीछे बाथरूम तक गई। नल टपक रहा था।
“पापा!” लीना ने पुकारा। “नल रो रहा है!” पापा हँसे और एक छोटा-सा औज़ार लेकर आए। उन्होंने उसे घुमाया, और घुमाया। टपकना बंद हो गया।
“हर बूँद ज़रूरी है,” पापा ने कहा। “पानी बहुत अनमोल है।”
अगली सुबह लीना ने दाँत ब्रश किए। ब्रश करते समय उसने नल बंद रखा, और कुल्ला करने के लिए ही दोबारा खोला। “अब कोई नल नहीं रोएगा!” उसने झाग भरी बड़ी-सी मुस्कान के साथ कहा।