मातेओ और लामा
मातेओ पेरू के ऊँचे पहाड़ों में रहता था। हर सुबह वह अपनी लामा पेपा के साथ हरे-भरे मैदान तक जाता था।
एक दिन बहुत तेज़ हवा चली, और मातेओ की लाल टोपी उड़ गई! वह पहाड़ी से नीचे लुढ़की और एक चट्टान के पीछे छिप गई। मातेओ ने बहुत ढूँढा, पर टोपी नहीं मिली।
पेपा ने हवा में कुछ सूँघा। फिर वह तेज़-तेज़ कदमों से पहाड़ी से नीचे उतरी। एक बड़ी चट्टान के पास रुककर उसने खुशी से गुनगुनाया।
वहीं थी लाल टोपी! मातेओ ने पेपा की मुलायम, ऊनी गर्दन को गले लगा लिया। “धन्यवाद, पेपा! तुम पहाड़ों की सबसे अच्छी मददगार हो!”