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स्कूल के बगीचे के एक कोने में प्रिया ने एक नन्हा-सा बीज बोया। वह इतना छोटा था कि धूल के कण जैसा लगता था। उसका दोस्त टॉम हँसा। “इससे तो कुछ भी नहीं उगेगा,” उसने कहा।
हर सुबह प्रिया बीज को थोड़ा-सा पानी देती। कई दिनों तक कुछ नहीं हुआ। प्रिया को चिंता हुई, पर उसने हिम्मत नहीं हारी। फिर एक सुबह उसने मिट्टी से झाँकता हुआ एक नन्हा हरा अंकुर देखा।
अंकुर हर हफ़्ते और लंबा होता गया। उस पर हथेलियों जितनी बड़ी पत्तियाँ आ गईं, और फिर सबसे ऊपर एक कली दिखाई दी। एक धूप भरे दिन कली खिल गई। वह एक बहुत बड़ा पीला सूरजमुखी था, टॉम से भी लंबा!
टॉम ऊपर देखता ही रह गया। “मैं गलत था,” उसने कहा। “छोटी चीज़ें भी कमाल की बन सकती हैं।” प्रिया मुस्कुराई और उसने टॉम को बोने के लिए उस फूल के कुछ बीज दिए।
सही उत्तर के पास वाले गोले में रंग भरो।