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सारा दिन बारिश होती रही, और आना और उसका छोटा भाई कोफ़ी बाहर खेलने नहीं जा सके। कोफ़ी ने अपनी नाक खिड़की से सटा दी। “यह अब तक का सबसे उबाऊ दिन है,” उसने कहा।
आना को एक तरकीब सूझी। उसने लकड़ी के दो चम्मच, एक खाली डिब्बा और सूखे राजमा से भरा एक जार ढूँढा। उसने डिब्बे को ढोल बना दिया और प्लास्टिक की एक बोतल में राजमा भरकर झुनझुना बनाया। कोफ़ी चम्मचों से पतीलों पर थाप देने लगा।
जल्दी ही दादी भी अपनी पुरानी सीटी लेकर आ गईं। सबने मिलकर एक शोर-शराबे वाला, खुशियों भरा बैंड बनाया, जिसका नाम था “बारिश की बूँदें”। उन्होंने तेज़ गाने भी बजाए और धीमे गाने भी, और रसोई की मेज़ के चारों ओर परेड की।
जब आख़िरकार बारिश रुकी, तो कोफ़ी हैरान रह गया। “इतनी जल्दी?” उसने पूछा। “क्या हम एक गाना और बजा सकते हैं?”
सही उत्तर के पास वाले गोले में रंग भरो।