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जब हाना रिवरसाइड की फ़ुटबॉल टीम में आई, तो बाक़ी खिलाड़ियों को समझ नहीं आया कि क्या करें। हाना सुन नहीं सकती थी, इसलिए न उसे कोच की सीटी सुनाई देती थी, न मैदान पर साथियों का “पास करो!” चिल्लाना। पहली प्रैक्टिस में गेंद दो बार उसके पास से निकल गई, क्योंकि उसे पता ही नहीं चला कि गेंद आ रही है।
प्रैक्टिस के बाद हाना ने अपनी नोटबुक में कुछ लिखा और कप्तान लुइस को दिखाया। उसमें लिखा था, “मैं अच्छा खेलती हूँ। पर मुझे यह देखना है कि तुम क्या चाहते हो, सुनना नहीं।”
लुइस पूरी शाम इसके बारे में सोचता रहा। अगले दिन उसे एक तरकीब सूझी। “क्यों न हम सब कुछ इशारे सीख लें?” उसने टीम से पूछा। हाना ने उन्हें हाथ के कुछ इशारे सिखाए: सीधी हथेली आगे की ओर धकेलने का मतलब था “पास करो”, ऊपर की ओर उठी उँगली का मतलब था “गोल पर मारो”, और दोनों हाथ आपस में क्रॉस करने का मतलब था “बचाव करो”। कोच अमीना ने सीटी की जगह लहराने के लिए एक चमकीला पीला झंडा रख लिया।
शुरू में खिलाड़ियों को सब अटपटा लगा। आदे ने “गोल पर मारो” और “बचाव करो” में गड़बड़ कर दी और उलटी दिशा में दौड़ गया। सब हँस पड़े, आदे भी। लेकिन वे रोज़ अभ्यास करते रहे, और जल्दी ही इशारे बोलने जितने आसान हो गए।
फिर कुछ हैरान करने वाला हुआ। अगले मैच में दूसरी टीम रिवरसाइड के खिलाड़ियों की चिल्लाकर बताई हर योजना सुन लेती थी, पर उनके चुपचाप इशारे नहीं समझ पाती थी। रिवरसाइड की रणनीति सबकी आँखों के सामने होकर भी एक राज़ थी। हाना ने लुइस को उँगली उठाते देखा और गेंद को घुमाते हुए सीधा जाल में पहुँचा दिया।
मैच के बाद दूसरी टीम की एक लड़की उसके पास आई। “तुम लोग यह कैसे करते हो?” उसने पूछा। हाना मुस्कुराई और उसे “दोस्त” का इशारा करके दिखाया।
सही उत्तर के पास वाले गोले में रंग भरो।