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लैला अपने दादाजी के साथ जॉर्डन के रेगिस्तान में कैंपिंग करने गई। जब सूरज डूबा, तो आसमान पहले गुलाबी हुआ, फिर बैंगनी और फिर गहरा नीला।
“ऊपर देखो,” दादाजी ने कहा। लैला हैरान रह गई। आसमान तारों से भरा था, इतने तारे उसने पहले कभी नहीं देखे थे!
“क्या हम इन्हें गिन सकते हैं?” लैला ने पूछा। उसने दस तक गिना, फिर बीस तक। फिर वह हँस पड़ी। “ये तो बहुत ज़्यादा हैं!”
दादाजी ने एक चमकीले तारे की ओर इशारा किया। “यह तारा रात में यात्रियों को रास्ता ढूँढने में मदद करता है।” लैला ने उस तारे से एक इच्छा माँगी: दादाजी के साथ तारों के नीचे और भी बहुत-सी रातें।
सही उत्तर के पास वाले गोले में रंग भरो।