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आमा घाना के एक छोटे-से गाँव में रहती थी। उसके घर के पास आम का एक बड़ा पेड़ था।
एक धूप भरी सुबह आमा ने देखा कि आम पक गए हैं। वे पीले और नारंगी थे, और उनकी खुशबू बहुत मीठी थी। उसने पूरी टोकरी भर ली।
“मैं इतने सारे आम अकेले नहीं खा सकती,” आमा ने कहा। इसलिए उसने आम बाँट दिए। एक आम एसी दादी को दिया, एक अपने दोस्त क्वामे को और एक बेकरी वाले को।
शाम को क्वामे एक कटोरी मूँगफली लेकर वापस आया। एसी दादी ने एक खुशी भरा गीत गाया। बेकरी वाला गरम-गरम ब्रेड लाया।
आमा मुस्कुराई। “बाँटने से हर चीज़ और भी स्वादिष्ट हो जाती है!”
सही उत्तर के पास वाले गोले में रंग भरो।