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लियो इंग्लैंड के ब्रिस्टल शहर में अपनी नानी के बगीचे में उनकी मदद कर रहा था, तभी उसे घास पर से एक बहुत हल्की-सी चीं सुनाई दी। झाड़ियों की बाड़ के नीचे एक छोटी भूरी चिड़िया बैठी थी, जिसकी छाती पर चित्तियाँ थीं और पूँछ छोटी-सी थी। वह फुदकी, अपने छोटे पंख फड़फड़ाए और लुढ़क गई।
“यह घोंसले से गिर गई है!” लियो चिल्लाया। “हमें इसे बचाना होगा!”
नानी ने अपनी छड़ी का सहारा लिया और पास से देखा। “रुको,” उन्होंने कहा। “इसके पंख देखो। यह कोई बेबस चूज़ा नहीं है। यह रॉबिन का बच्चा है, जिसने जान-बूझकर घोंसला छोड़ा है। यह उड़ना सीख रहा है, और इसमें कुछ दिन फुदकते-फुदकते लग सकते हैं।”
“पर यह बिल्कुल अकेला है,” लियो ने कहा। “क्या सच में?” नानी मुस्कुराईं। “चलो, रसोई की खिड़की से देखते हैं।” कुछ मिनट बाद चमकीली नारंगी छाती वाला एक बड़ा रॉबिन झपट्टा मारकर नीचे आया और उसने एक केंचुआ सीधा बच्चे की खुली चोंच में डाल दिया।
“माता-पिता हर समय पास ही रहते हैं,” नानी ने समझाया। “अगर हम इसे उठा लें, तो हम इसे इसकी सबसे अच्छी देखभाल करने वालों से दूर कर देंगे।” लियो ने ख़ूब सोचा। “तो हम मदद कैसे करें?”
उन्होंने एक योजना बनाई। नानी ने पूरे हफ़्ते अपनी बिल्ली मुरब्बा को घर के अंदर रखा। लियो ने बाड़ के पास पानी की एक उथली कटोरी रख दी। हर दोपहर स्कूल के बाद वह खिड़की से देखता और अपनी कॉपी में लिखता।
गुरुवार को बच्चा फुदककर बगीचे की बेंच पर आ गया। शुक्रवार को वह फड़फड़ाकर बाड़ तक पहुँचा। शनिवार को लियो ने उसे सेब के पेड़ तक उड़ते देखा, जहाँ उसके पापा गा रहे थे।
लियो ने अपनी कॉपी में आख़िरी पंक्ति लिखी: “कभी-कभी सबसे अच्छी मदद देखते रहना और इंतज़ार करना होती है।”
सही उत्तर के पास वाले गोले में रंग भरो।