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हॉन्ग कॉन्ग की जूनियर ड्रैगन बोट टीम में होई लाम सबसे छोटी थी। जब कोच, मिसेज़ चेउंग, ने काम बाँटे, तो चप्पू चलाने वालों को चप्पू मिले, नाव मोड़ने वाले को पीछे का लंबा चप्पू मिला, और होई लाम को मिला… एक ढोल।
“ढोल?” उसने निराश होकर कहा। “पर मैं तो चप्पू चलाना चाहती हूँ!” “ढोल नाव का दिल है,” मिसेज़ चेउंग ने कहा। “देखो, इसके बिना क्या होता है।”
पहली प्रैक्टिस में टीम ने बिना ताल के चप्पू चलाए। कुछ चप्पू पहले पानी में गए, कुछ बाद में। वे आपस में टकराए, हर तरफ़ पानी उछला, और नक्काशीदार ड्रैगन के सिर वाली लंबी नाव टेढ़ी-मेढ़ी डगमगाती हुई खाड़ी में चली। सब भीग गए और हँसते रहे, पर वे मुश्किल से आगे बढ़े थे।
फिर होई लाम आगे की ओर, चप्पू चलाने वालों की तरफ़ मुँह करके बैठी और ढोल बजाने लगी। ढम… ढम… ढम। धीरे-धीरे सारे चप्पू एक साथ, एक ही पल में पानी में जाने लगे, जैसे किसी एक विशाल जीव की टाँगें। नाव इतनी सहजता से आगे लपकी कि होई लाम को अपने बालों में हवा महसूस हुई।
रेस के दिन तट पर भीड़ और शोर था। होई लाम को अपना ढोल भी मुश्किल से सुनाई दे रहा था, इसलिए वह चप्पू चलाने वालों के कंधों को देखती रही और अपनी ताल एक जैसी बनाए रखी, तब भी जब उसकी बाँहें दुखने लगीं। उनकी नाव ने दो नावों को पीछे छोड़ा और दूसरे स्थान पर फ़िनिश लाइन पार की।
टीम खुशी से चिल्लाते हुए उथले पानी में कूद पड़ी, और किसी ने होई लाम को अपने कंधों पर उठा लिया। “अब भी चप्पू चाहिए?” मिसेज़ चेउंग ने पूछा। होई लाम ने अपने ढोल को थपथपाया। “नहीं,” उसने कहा। “हर नाव को एक धड़कन चाहिए।”
सही उत्तर के पास वाले गोले में रंग भरो।