इस डिवाइस पर रखा है
जब से तमिका को याद था, नानाजी विंस्टन का पुराना रेडियो जमैका के किंग्स्टन में उनकी बैठक की अलमारी पर रखा रहता था। उसका रंग टॉफ़ी जैसा था और उस पर एक बड़ा गोल डायल था, पर वह सालों से चुप था।
“हम इसे फेंककर नया क्यों नहीं ले लेते?” एक बरसाती शनिवार को तमिका ने पूछा। नानाजी ने सिर हिलाया। “इस रेडियो ने मेरी शादी में संगीत बजाया था,” उन्होंने कहा। “इसे फेंकने की नहीं, ठीक करने की ज़रूरत है।”
तो उन्होंने मेज़ खाली की और औज़ारों का बक्सा खोला। नानाजी ने पीछे का ढक्कन खोला, और तमिका ने अंदर झाँका: तारों, कुंडलियों और छोटे-छोटे रंगीन पुर्ज़ों का एक नन्हा शहर।
“अच्छा मरम्मत करने वाला जासूस जैसा होता है,” नानाजी ने कहा। “हम सुराग ढूँढते हैं।” उन्होंने प्लग जाँचा: ठीक। स्विच जाँचा: ठीक। फिर तमिका ने टॉर्च से अंदर रोशनी डाली और उसे ढूँढ लिया: एक पतला तार, जो टूटकर लटक रहा था।
आजकल नानाजी के हाथ थोड़े काँपते थे, इसलिए तमिका ने तार को मज़बूती से पकड़े रखा और नानाजी ने ध्यान से उसे जोड़ा। फिर दोनों ने मिलकर जोड़ पर टेप लपेटा। फिर तमिका ने डायल घुमाया।
पहले खड़खड़ हुई। फिर सरसराहट। और अचानक कमरा संगीत से भर गया: ढोल, गिटार और एक गायिका, जिसकी आवाज़ गुनगुने शहद जैसी थी। नानाजी ने आँखें बंद कीं और झूमने लगे। तमिका ने उनके हाथ पकड़े, और दोनों मेज़ के चारों ओर नाचने लगे।
अगले हफ़्ते पूरी गली ने पार्टी की, और टॉफ़ी जैसे रंग वाला रेडियो घर की सीढ़ियों पर सम्मान की जगह पर रखा गया, जहाँ वह सारी दोपहर बजता रहा। “ठीक की गई चीज़ों की कहानियाँ सबसे अच्छी होती हैं,” नानाजी ने कहा, और तमिका ने हामी भरी।
सही उत्तर के पास वाले गोले में रंग भरो।