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काहिरा में नूर के घर सोने का समय हो गया है। बाबा छोटा लैंप जलाते हैं। पर बिल्ली की बच्ची मीसो कहाँ सोएगी?
मीसो एक जूते में कूद जाती है। “बहुत छोटा!” नूर कहती है। मीसो कपड़ों की टोकरी में कूद जाती है। “बहुत ऊबड़-खाबड़!” बाबा कहते हैं।
मीसो किताबों की अलमारी पर कूद जाती है। “बहुत ऊँचा!” नूर कहती है। मीसो खिलौनों के डिब्बे में कूद जाती है। चीं-चीं! “बहुत शोर!” बाबा कहते हैं।
फिर मीसो नूर के बिस्तर पर, उसके तकिए के ठीक पास, गोल-मोल होकर लेट जाती है। घुर्र, घुर्र। “एकदम बढ़िया,” नूर फुसफुसाती है। बाबा मुस्कुराते हैं। “शुभ रात्रि, नूर। शुभ रात्रि, मीसो।”
सही उत्तर के पास वाले गोले में रंग भरो।