बैटन आगे बढ़ाओ!
ज़ैनब तीसरी कक्षा की सबसे तेज़ धावक थी। खेल दिवस पर उसे तोमास, एली और क्वामे के साथ रिले दौड़ में दौड़ना था। हर बच्चा ट्रैक का एक चक्कर लगाकर लाल बैटन अगले धावक को थमाने वाला था।
पहली प्रैक्टिस में सब गड़बड़ हो गया। ज़ैनब इतनी तेज़ दौड़ी कि तोमास तैयार ही नहीं था। बैटन घास पर गिर गया। फिर एली और क्वामे आपस में टकरा गए। “हम तो बिल्कुल गड़बड़ हैं!” क्वामे ने कराहते हुए कहा।
कोच रोज़ा ने सबको पास बुलाया। “रिले दौड़ किसी एक तेज़ धावक की नहीं होती,” उन्होंने कहा। “यह चार धावकों और तीन अच्छे पास की दौड़ है।” उन्होंने सिखाया कि हाथ पीछे की ओर कैसे फैलाना है और बैटन आते ही “अभी!” कैसे चिल्लाना है।
पूरे हफ़्ते उन्होंने बार-बार बैटन थमाने की प्रैक्टिस की। तोमास बहुत तेज़ नहीं था, पर उसने कभी बैटन नहीं गिराया। एली ने बिल्कुल सही पल पर दौड़ना शुरू करना सीख लिया।
खेल दिवस पर सीटी बजी। ज़ैनब ने अपनी पूरी ताक़त से दौड़ लगाई, और हर पास एकदम सही रहा। टीम दूसरे स्थान पर फ़िनिश लाइन पार कर गई। वे पहले नहीं आए, फिर भी वे ऐसे उछले और ख़ुशी से चिल्लाए, जैसे उन्होंने स्वर्ण पदक जीत लिया हो।