हाथों से नमस्ते
सोमवार को नॉर्वे के एक छोटे-से शहर में फ्रेया की कक्षा में एक नया लड़का आया। उसका नाम एलियास था। टीचर ने बताया कि एलियास सुन नहीं सकता, इसलिए वह सांकेतिक भाषा में अपने हाथों से बात करता है।
खेल के समय फ्रेया उसे हैलो कहना चाहती थी, पर उसे शर्म आ रही थी। अगर एलियास उसकी बात न समझे तो?
वह उसके पास बेंच पर बैठ गई। उसने मुस्कुराकर हाथ हिलाया। एलियास भी मुस्कुराया। फिर उसने अपना हाथ माथे तक उठाया और आगे की ओर हटा दिया, जैसे छोटा-सा सलाम। उसने फ्रेया की ओर इशारा किया और फिर से वैसा ही किया।
फ्रेया ने उसकी नकल की। एलियास ने सिर हिलाया और तालियाँ बजाईं। फ्रेया ने अपना पहला संकेत सीख लिया था: हैलो!
उसके बाद एलियास रोज़ फ्रेया को एक नया संकेत सिखाने लगा: दोस्त, बर्फ़, खेलना और फ्रेया का सबसे पसंदीदा, हॉट चॉकलेट। फ्रेया ने एलियास को बर्फ़ की गुफा बनाना सिखाया।
जल्दी ही बाकी बच्चे भी सीखना चाहने लगे। सर्दियों के आखिर तक पूरी कक्षा एलियास को संकेतों में “सुप्रभात” कह सकती थी। और एलियास बड़ी-सी मुस्कान के साथ हाथों से जवाब देता, “सुप्रभात, दोस्तो!”