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बिस्कुट एक गाइड डॉग है। उसका काम तनाका जी की मदद करना है, क्योंकि वे देख नहीं सकते। हर सुबह बिस्कुट अपना ख़ास पट्टा पहनती है। अब वह काम पर है!
आज वे दोनों बेकरी जा रहे हैं। मोड़ पर बिस्कुट रुक जाती है। वह सड़क के किनारे तब तक इंतज़ार करती है, जब तक सड़क पार करना सुरक्षित न हो। फिर उसे रास्ते में पानी का एक बड़ा गड्ढा दिखता है। वह उसके चारों ओर से घूमकर जाती है, ताकि तनाका जी के जूते सूखे रहें।
बेकरी में तनाका जी गरम-गरम ब्रेड ख़रीदते हैं। “शाबाश, बिस्कुट,” वे धीरे से कहते हैं।
घर पहुँचकर बिस्कुट अपना पट्टा उतारती है। अब खेलने का समय है!
सोमवार को नॉर्वे के एक छोटे-से शहर में फ्रेया की कक्षा में एक नया लड़का आया। उसका नाम एलियास था। टीचर ने बताया कि एलियास सुन नहीं सकता, इसलिए वह सांकेतिक भाषा में अपने हाथों से बात करता है।
खेल के समय फ्रेया उसे हैलो कहना चाहती थी, पर उसे शर्म आ रही थी। अगर एलियास उसकी बात न समझे तो?
वह उसके पास बेंच पर बैठ गई। उसने मुस्कुराकर हाथ हिलाया। एलियास भी मुस्कुराया। फिर उसने अपना हाथ माथे तक उठाया और आगे की ओर हटा दिया, जैसे छोटा-सा सलाम। उसने फ्रेया की ओर इशारा किया और फिर से वैसा ही किया।
फ्रेया ने उसकी नकल की। एलियास ने सिर हिलाया और तालियाँ बजाईं। फ्रेया ने अपना पहला संकेत सीख लिया था: हैलो!
उसके बाद एलियास रोज़ फ्रेया को एक नया संकेत सिखाने लगा: दोस्त, बर्फ़, खेलना और फ्रेया का सबसे पसंदीदा, हॉट चॉकलेट। फ्रेया ने एलियास को बर्फ़ की गुफा बनाना सिखाया।
जल्दी ही बाकी बच्चे भी सीखना चाहने लगे। सर्दियों के आखिर तक पूरी कक्षा एलियास को संकेतों में “सुप्रभात” कह सकती थी। और एलियास बड़ी-सी मुस्कान के साथ हाथों से जवाब देता, “सुप्रभात, दोस्तो!”
हर पतझड़ में मेई के शहर में लालटेन रात मनाई जाती है। जब आसमान में अँधेरा हो जाता है, तो सब लोग जगमगाती काग़ज़ की लालटेनें लेकर नदी किनारे चलते हैं। कहीं मछली वाली लालटेनें होती हैं, कहीं तारे वाली, और एक विशाल ड्रैगन लालटेन भी, जिसे दस लोग मिलकर उठाते हैं।
इस साल मेई ने स्कूल में अपनी लालटेन ख़ुद बनाई थी। वह एक सफ़ेद खरगोश था, जिसके लंबे कान और गुलाबी काग़ज़ की आँखें थीं। मेई ने पूरे एक हफ़्ते उस पर मेहनत की थी।
लेकिन जुलूस शुरू होने से ठीक पहले बारिश की कुछ बूँदें गिरीं। एक बूँद खरगोश के कान पर गिरी, और पतला काग़ज़ फट गया। मेई की आँखों में आँसू भर आए। “मेरा खरगोश तो ख़राब हो गया,” उसने कहा।
पास ही उसके पड़ोसी, बुज़ुर्ग ली अंकल खड़े थे। “ज़रा दिखाओ तो,” उन्होंने कहा। उन्होंने जेब से पारदर्शी टेप का रोल निकाला और प्यार से कान जोड़ दिया। मेई के दोस्त बाओ ने उसे एक छोटा छाता दे दिया, ताकि लालटेन भीग न जाए।
थोड़ी देर में बारिश रुक गई। मेई अपने धीरे-धीरे चमकते खरगोश को लेकर नदी किनारे चल पड़ी। जुड़ा हुआ कान थोड़ा टेढ़ा था, इसलिए लगता था जैसे खरगोश कुछ सुन रहा हो। “मुझे लगता है, इसे संगीत पसंद आ रहा है,” ली अंकल ने मुस्कुराते हुए कहा।