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आवा सेनेगल के एक गाँव में रहती है। दादाजी ने उसके लिए एक छोटा-सा ढोल बनाया है। ढम-ढम! ढोल बजता है।
ढम-ढम! मुर्गी ढोल सुनती है। फड़-फड़! मुर्गी नाचती है।
ढम-ढम! कुत्ता ढोल सुनता है। पूँछ हिलाओ, पूँछ हिलाओ! कुत्ता नाचता है। नन्हा मूसा ढोल सुनता है। ताली, ताली! नन्हा मूसा भी नाचता है।
फिर आवा रुक जाती है। श्श्श। सब थक गए हैं। मुर्गी, कुत्ता और नन्हा मूसा गहरी नींद में सो जाते हैं। “शुभ रात्रि,” आवा फुसफुसाती है।
सही उत्तर के पास वाले गोले में रंग भरो।